एन सी सी गीत का इतिहास

एन सी सी गीत का इतिहास

जनवरी 1956 में हुए सर्कल कमांडर्स (वर्तमान के उपमहानिदेशक) सम्मेलन में एक एन. सी. सी. गान बनाने की आवश्यकता महसूस की गई और इस संबंध में सभी सर्कल्स को अपना प्रस्ताव भेजने को कहा गया।      एन. सी. सी. का आधिकारिक गान- “कदम मिला के चल” को 1963 में स्वीकृति मिली और रक्षा मंत्रालय के अनुमोदन के साथ 1969 में इसका पंजीकरण किया गया। वर्ष 1974 में यह महसूस किया गया कि यह एन सी सी गीत युवाओं में वैसा प्रभाव उत्पन्न करने में सक्षम नहीं है और इसको बदलने की आवश्यकता है। इसके लिए एक लगातार प्रक्रिया आरंभ हो गयी, सभी निदेशालयों से उपयुक्त गीत भेजने को कहा गया, 107 गीत मिले, जिनमें से आठ गीतों को एक अधिकारी मंडल द्वरा चुना गया तथापि, इस मंडल के जज, दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ नगेन्द्र को ये आठों गीत स्तरीय नहीं लगे। उन्हीं की सलाह पर यह काम ए. आई. आर. दिल्ली के नाटक प्रभाग के मुख्य निर्माता श्री चिरनजीत को सौंपा गया। सन् 1976 में श्री चिरनजीत द्वरा लिखे गये गीत को अनुमोदन प्राप्त हुआ। महाराष्ट्र निदेशालय को कहा गया कि श्री राजकपूर की मदद से, बॉम्बे फिल्म प्रभाग इस गीत को संगीतबद्ध और रिकॉर्ड करें, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो पाया क्योंकि श्री राजकपूर अपनी फिल्म “सत्यम् शिवम् सुन्दरम्” बनाने में व्यस्त थे और फिल्म प्रभाग के स्टूडियो का नवीकरण कार्य चल रहा था। बाद में दिल्ली के एक प्रख्यात कवि श्री महिंदर सिंह बेदी को एक गीत लिखने का अनुरोध किया गया। यह प्रयास भी सफल नहीं हो पाया।

      लगभग इसी समय, एन. सी. सी. महानिदेशालय के स्वतंत्र प्रयास से फिल्म प्रभाग ने “एन. सी. सी.-एक कैडेट की डायरी” नाम से एक डॉकूमेंटरी के निर्देशक को इस फिल्म के लिए एक उपयुक्त गाने की तलाश थी। उन्होंने 1968-69 में चंडीगढ के एक युवा महोत्सव के दौरान “हम सब हिंदी हैं”  नाम का गीत पहली बार सुना और इस गीत को उन्होंने अपनी डॉकूमेंटरी फिल्म में शामिल कर लिया।

      यह गीत लोकप्रिय हुआ और आने वाले कई महानिदेशकों ने गणतंत्र दिवस शिविरों में इसे बार-बार बजाया। 1980 में इसके शब्द ‘हिंदी’ को बदल कर ‘भारतीय’ कर दिया गया।